शनि योग शांति पूजा
साढ़े साती एवं शनि दोष की शांति हेतु, शनि कलश यंत्र सहित 108 अष्टोत्तरी पाठ और भैरव नामावली के साथ उज्जैन में सम्पन्न की जाने वाली सम्पूर्ण शांति पूजा।
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बेसिक— शनि शांति
- संकल्प एवं गणेश-अंबिका-वरुण पूजन
- नवग्रह रुद्र स्थापन पूजन
- शनि कलश यंत्र स्थापना
- प्रसाद आपके पते पर भेजा जाएगा
स्टैंडर्ड— 108 अष्टोत्तरी
- पूर्ण शनि योग शांति पूजा (बेसिक सहित)
- 108 अष्टोत्तरी पाठ पूजन
- रक्षा सूत्र एवं स्थापना यंत्र
- संकल्प सुपारी एवं प्रसाद
शनि योग शांति पूजा
न्याय करने वाले ग्रह शनि — नवग्रहों में दंडाधिकारी, कर्मों का फलित एवं विधान लिखने वाले, चाहे धीमे ही सही, न्याय और सत्य को सामने लाने वाले माने जाते हैं। शनि ग्रह की विशेष 108 अष्टोत्तरी पाठ के साथ शनि योग शांति पूजा की जाती है।
साढ़े साती के समय जन्मकुंडली में स्थिति-जन्य भय उत्पन्न होने से निर्मित शनि योगों तथा अन्य ग्रहों की युति से उत्पन्न शनि योगों की शांति हेतु — "भैरवो देवः संसार भयनाशनम्, अनेक जन्म कृतं पापम् दर्शनेन विनश्यति" के भाव के साथ शनि योग शांति पूजा सम्पन्न की जाती है।
भैरवनाथ — भय के नाशक
भगवान शिव के एक अत्यंत शक्तिशाली, रक्षक अवतार हैं भैरव। भैरव शब्द का अर्थ है भय का नाश करने वाला या भयंकर रूप — उन्हें ब्रह्मांडीय समय (काल) का संरक्षक भी माना जाता है।
उपासना की दृष्टि से भैरवनाथ एक दयालु और शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता हैं तथा उज्जैन में भैरव की जागृत प्रतिमा है। बटुक भैरव जहां सौम्य गुणों में वृद्धि करते हैं, सुख-समृद्धि कारक हैं — वहीं काल भैरव आपराधिक प्रवृत्तियों पर नियंत्रण करने वाले प्रचण्ड दंड नायक के रूप में प्रसिद्ध हैं। काल भैरव को भैरवनाथ का युवा रूप, तो बटुक भैरव को भैरवनाथ का बाल रूप कहा गया है।
उज्जैन में शनि योग शांति पूजा विशेष भैरव नामावली के साथ सम्पन्न की जाती है।
पूजा विधि
जन्मकुंडली का अध्ययन कर विशेष मुहूर्त एवं इच्छित संकल्प के अनुसार शनि योग शांति पूजा की जाती है।
श्री गणेश, अंबिका, वरुण पूजन एवं पुण्याह वाचन।
मंडल मातृकाएं पूजन एवं नांदी श्राद्ध।
नवग्रह रुद्र स्थापन पूजन।
शनि कलश यंत्र सहित 108 अष्टोत्तरी पाठ पूजन।
हवन, उत्तर पूजन, नैवेद्य, भोग, आरती, प्रदक्षिणा एवं क्षमापना।
रक्षा सूत्र, स्थापना यंत्र, संकल्प सुपारी एवं प्रसाद भेंट किया जाता है।