कालसर्प योग शांति पूजा
राहु-केतु से निर्मित कालसर्प योग के दुष्प्रभावों को शांत करने हेतु, आपकी जन्मकुंडली के अनुसार वैदिक विद्वान ब्राह्मणों द्वारा संकल्पपूर्वक की जाने वाली सम्पूर्ण शांति पूजा — उज्जैन में रुद्राभिषेक सहित।
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बेसिक— कालसर्प शांति योग शांति पूजा
- संकल्प एवं गणेश-अंबिका-वरुण पूजन
- कालसर्प मंडल स्थापना पूजन
- हवन एवं उत्तर पूजन
- प्रसाद आपके पते पर भेजते हैं
स्टैंडर्ड— कालसर्प योग शांति पूजा+ रुद्राभिषेक
- पूर्ण कालसर्प योग शांति पूजा (बेसिक सहित)
- सकृत रुद्राभिषेक
- लग्न ग्रह उपरत्न एवं श्री यंत्रम्
- रक्षा सूत्रम् एवं प्रसाद
कालसर्प योग क्या है?
'काल' का अर्थ मृत्यु और 'सर्प' का अर्थ दंश से है। राहु को सर्प का सिर और केतु को पूंछ माना जाता है। जब जन्मकुंडली में सभी सात ग्रह राहु-केतु के बीच एक ओर आ जाते हैं, तब यह योग बनता है।
इस योग के प्रभाव से मन के कार्य, वाणी और धन के कार्य, पराक्रम, संपत्ति के कार्य, शिक्षा और संतान के कार्य, रोग एवं शत्रु भय, विवाह एवं गृह क्लेश, मृत्यु भय, करियर, मन की इच्छा पूर्ति एवं आय वृद्धि तथा व्यय संबंधित कार्यों में बार-बार रुकावटें आती हैं और देरी होती है।
कालसर्प योग वाले जातक को अज्ञात भय, एकाग्रता में कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इससे पीड़ित व्यक्ति को जीवन में निरंतर मानसिक तनाव, व्यापार में हानि, विवाह में देरी और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
कालसर्प योग के 12 प्रकार
अनंत कालसर्प योग (राहु लग्न / केतु सप्तम)
वासुकी कालसर्प योग (राहु द्वितीय / केतु अष्टम)
कुलिक कालसर्प योग (राहु तृतीय / केतु नवम)
शंखपाल कालसर्प योग (राहु चतुर्थ / केतु दशम)
पद्म कालसर्प योग (राहु पंचम / केतु एकादश)
महापद्म कालसर्प योग (राहु षष्टम / केतु द्वादश)
तक्षक कालसर्प योग (राहु सप्तम / केतु लग्न)
शेषनाग कालसर्प योग (राहु अष्टम / केतु द्वितीय)
पद्मनाभ कालसर्प योग (राहु नवम / केतु तृतीय)
पातक कालसर्प योग (राहु दशम / केतु चतुर्थ)
विषधर कालसर्प योग (राहु एकादश / केतु पंचम)
शेषनाग कालसर्प योग (राहु द्वादश / केतु षष्ठम)
कालसर्प योग शांति पूजा विधि
सबसे पहले जन्मकुंडली में कौन सा कालसर्प योग है, उसके अनुसार क्या कष्ट हो रहे हैं — इनका अध्ययन कर संकल्प तैयार किया जाता है।
शुभ मुहूर्त में श्री गणेश, अंबिका पूजन, वरुण पूजन एवं पुण्याह वाचन किया जाता है।
मंडल मातृकाएं पूजन, नांदी श्राद्ध एवं नवग्रह रुद्र स्थापना सम्पन्न की जाती है।
कालसर्प मंडल स्थापना पूजन कर हवन किया जाता है।
उत्तर पूजन, नैवेद्य, भोग, आरती, प्रदक्षिणा एवं क्षमापना की जाती है।
लग्न ग्रह का उपरत्न, श्री यंत्रम्, रक्षा सूत्रम् एवं प्रसाद आपको भेजी जाती है। साथ ही लग्न, राशि और महादशा के ग्रहों की प्रसन्नता हेतु प्रतिदिन श्रवण करने वाले मंत्रोच्चार के ऑडियो ट्रैक भी दिए जाते हैं।
रुद्राभिषेक — उज्जैन में विशेष महत्व
रुद्राभिषेक से आध्यात्मिक शांति मिलती है, पापों से मुक्ति होती है, स्वास्थ्य लाभ होता है और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है — इन सभी के लिए रुद्राभिषेक सर्वोत्तम माना जाता है।
श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग तीर्थ नगरी उज्जैन में रुद्राभिषेक करने से विशेष लाभ होता है, और सभी तीर्थ नगरियों में तिल भर बड़ी उज्जैन नगरी में करने से महा पुण्य लाभ की प्राप्ति होती है।
रुद्राभिषेक आपके नाम, गौत्र और आपके इच्छित संकल्प के साथ किया जाता है। इसमें वैदिक विद्वान ब्राह्मणों द्वारा श्री गणेश, अंबिका का पूजन और वरुण पूजन किया जाता है, उसके बाद भगवान शिव का पंचामृत पूजन कर सकृत रुद्रपाठ द्वारा अभिषेक किया जाता है। तत्पश्चात उत्तर पूजन, राजसी श्रृंगार, नैवेद्य, भोग, आरती एवं क्षमापना के बाद आपको प्रसाद भेजी जाती है।
ॐ त्र्यंबकं यजामहे सुगन्धिम् पुष्टिवर्धनम्, उर्वारुकमिव बंधनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥