कुम्भ विवाह शांति पूजा
मांगलिक योग, सप्तम-अष्टम भाव ग्रह दोष एवं विवाह में हो रहे अत्यधिक विलंब के शास्त्रीय निवारण हेतु—उज्जैन स्थित सिद्ध मंगलनाथ धाम में आपकी जन्मकुंडली आधारित कस्टमाइज्ड कुम्भ विवाह शांति पूजा।
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मांगलिक योग और विवाह में अनचाही देरी से परेशान हैं?
- मांगलिक योग होने से और मन पसंद जीवनसाथी के चयन में उम्र निकल रही है?
- विवाह संस्कार में लगातार देरी, दुविधा और अड़चनें बनी हुई हैं?
- रिश्ते आते हैं, बात बनते-बनते टूट जाती है या असमंजस बना रहता है?
- मन का काम नहीं हो पा रहा और चिंता बढ़ती जा रही है?
देरी, असमंजस, चिंता और दुविधा को सुविधा में बदलें! भगवान श्री महाकालेश्वर की नगरी उज्जैन में मंगलनाथ धाम सिद्ध क्षेत्र में अपनी जन्मकुंडली के एस्ट्रो गाइडेड डिटेल्स पर आधारित शुभ मुहूर्त में कस्टमाइज्ड कुंभ विवाह पूजा संपन्न कराएं, विवाह में देरी, दुविधा और असमंजस से मुक्ति पाएं। मन पसंद जीवनसाथी, शुभ विवाह प्रसंग और दाम्पत्य जीवन निश्चिंत करें।
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बेसिक — कुम्भ विवाह शांति पूजा
- नाम-गौत्र व मनोकामना संकल्प सहित पूजा
- श्री गणेश, अंबिका एवं वरुण पूजन
- पुण्याह वाचन, मंडल मातृकाएं एवं नवग्रह स्थापन
- शास्त्रीय कुम्भ विवाह प्रसंग एवं हवन
- प्रसाद एवं रक्षा सूत्र आपके पते पर प्रेषित
स्टैंडर्ड — कस्टमाइज्ड कुम्भ विवाह एवं मांगलिक शांति
- पूर्ण कुम्भ विवाह विधान (बेसिक सहित)
- नांदी श्राद्ध एवं विशेष रुद्र स्थापन
- लग्न, राशि, महादशा आधारित विशेष मांगलिक दोष शांति
- विशेष दोष निवारक औषधीय हवन व पूर्णाहुति
- प्रतिदिन सुनने वाले कस्टमाइज्ड मंत्रोच्चार ऑडियो ट्रैक्स
कुम्भ विवाह की वैदिक अवधारणा और महत्व
शास्त्रों के अनुसार जब किसी कन्या की जन्मकुंडली में लग्न, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में मंगल की उपस्थिति से तीव्र मांगलिक योग बन रहा हो, वैधव्य योग, विष कन्या योग अथवा सप्तम भाव दूषित हो, तो विवाह में अकारण बाधाएं आती हैं या रिश्ते तय होने में उम्र निकल जाती है।
कुम्भ विवाह में शास्त्रीय विधि से मिट्टी के कलश (कुम्भ) में सर्वव्यापक भगवान श्री विष्णु की प्राण-प्रतिष्ठा कर कन्या का विवाह संपन्न कराया जाता है। इसके पश्चात कुम्भ का विधिवत विसर्जन किया जाता है, जिससे कुंडली के सभी मांगलिक एवं वैवाहिक दोष कुम्भ पर समाहित होकर समाप्त हो जाते हैं। जन्मकुंडली के एस्ट्रो गाइडेड डिटेल्स के मुहूर्त आधारित कस्टमाइज्ड कुम्भ विवाह शांति पूजा से विवाह और मेल-मिलाप के सभी विघ्न-बाधाओं का लोप होता है और मनःकामनाएं पूर्ण होती हैं।
कुम्भ विवाह शांति पूजा से लाभ
पूजा विधि
कुम्भ विवाह शांति पूजा में वैदिक विद्वान आचार्यों द्वारा शास्त्रोक्त क्रम से संपूर्ण कर्मकांड सम्पन्न किए जाते हैं।
संकल्प — यजमान के नाम, गौत्र एवं विवाह बाधा निवारण व अभीष्ट दांपत्य सुख का शास्त्रीय संकल्प।
श्री गणेश, अंबिका एवं वरुण पूजन — विघ्नहर्ता गणपति जी, कुलदेवी अंबिका व वरुण देव का आह्वान एवं पूजन।
पुण्याह वाचन, मंडल मातृकाएं एवं नांदी श्राद्ध — शुद्धि मंत्र, मातृका पूजन एवं पितरों के आशीर्वाद हेतु नांदी श्राद्ध।
नवग्रह एवं रुद्र स्थापन — नवग्रह शांति, मंगल ग्रह तुष्टि तथा भगवान शिव के रुद्र स्वरूप की मंडल प्रतिष्ठा।
कुम्भ विवाह प्रसंग — भगवान श्री विष्णु स्वरूप कुम्भ का प्रतिष्ठापन, कन्या के साथ सप्तपदी, फेरे व पाणिग्रहण संस्कार।
हवन, आरती एवं ऑडियो ट्रैक्स — औषधीय समिधाओं से विशेष हवन, आरती, कुम्भ विसर्जन तथा नित्य श्रवण हेतु मंत्र ट्रैक्स प्रेषण।
उज्जैन में विशेष महत्व
भगवान श्री महाकालेश्वर की नगरी उज्जैन में मंगलनाथ धाम सिद्ध क्षेत्र में आपकी जन्मकुंडली के एस्ट्रो गाइडेड डिटेल्स पर आधारित शुभ मुहूर्त में कस्टमाइज्ड कुंभ विवाह पूजा संपन्न कराई जाती है। मत्स्य व स्कंद पुराण के अनुसार मंगलनाथ तीर्थ भूमिपुत्र मंगल देव की जन्मस्थली है, जहां किया गया अनुष्ठान मांगलिक दोषों को जड़ से शांत करता है।
सर्वोत्तम समय एवं मुहूर्त
कुम्भ विवाह शांति पूजा आपकी जन्मकुंडली के लग्न, राशि, महादशा तथा नवम-पञ्चम ग्रहों की अनुकूलता देखकर निकाले गए विशेष व्यक्तिगत शुभ मुहूर्त में ही की जाती है।